‘सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी’ में वरुण धवन और जान्हवी कपूर की जोड़ी ने फेस्टिव सीजन में नई रॉम-कॉम पेश की है। जानिए इस फिल्म में क्या खास है, क्या कमजोर — पूरी ईमानदार रिव्यू में।
🌟 फिल्म का परिचय: फेस्टिव सीजन की नई रॉम-कॉम
दशहरा और दिवाली के इस फेस्टिव मौसम में करण जौहर और डायरेक्टर शशांक खेतान की जोड़ी फिर लौटी है अपनी खास रोमांटिक-कॉमेडी के साथ —
‘सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी’।
अगर आपको ‘हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया’ और ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’ पसंद आई थीं, तो यह फिल्म आपको उसी दुनिया में वापस ले जाएगी — जहां प्यार, कॉमेडी और पारिवारिक ड्रामा का परफेक्ट मिश्रण देखने को मिलता है।
लेकिन सवाल है — क्या यह फिल्म आपके समय और पैसे के लायक है? आइए जानते हैं।
🍿 कहानी क्या है?
फिल्म की कहानी दो टूटे दिलों की है —
सनी (वरुण धवन) और तुलसी (जान्हवी कपूर), जिन्हें उनके पुराने प्यार ने ठुकरा दिया है।
कहानी में ट्विस्ट तब आता है, जब दोनों अपने-अपने एक्स-पार्टनर्स अनन्या (सान्या मल्होत्रा) और विक्रम (रोहित सराफ) की शादी में बिन बुलाए मेहमान बनकर पहुंचते हैं।
वहीं से शुरू होता है कन्फ्यूजन, कॉमेडी और फिर धीरे-धीरे खिलती एक नई लव स्टोरी।
इस सफर में समाज की पुरानी सोच, फैमिली प्रेशर और रिश्तों की उलझनें कहानी को रंगीन और मनोरंजक बनाती हैं।
👍 क्या अच्छा है फिल्म में?
🎭 1. वरुण धवन का जलवा
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं वरुण धवन।
‘बेबी जॉन’ जैसी एक्शन मूवी के बाद वरुण अपने पुराने चुलबुले और शरारती अंदाज़ में लौटे हैं।
उनकी एनर्जी, टाइमिंग और कॉमिक एक्सप्रेशन आपको गोविंदा की याद दिलाएंगे।
कह सकते हैं, उन्होंने इस कमजोर कहानी वाली नाव को अपने दम पर डूबने से बचाया है।
🎉 2. फेस्टिव एंटरटेनमेंट फैक्टर
यह फिल्म पूरी तरह एक फैमिली एंटरटेनर है — रंग, रोशनी, म्यूजिक और हंसी से भरपूर।
अगर आप बिना ज़्यादा सोच-विचार के एक हल्की-फुल्की फिल्म देखना चाहते हैं, तो यह आपको निराश नहीं करेगी।
💬 3. छोटे लेकिन असरदार सोशल मैसेज
कॉमेडी के बीच फिल्म सेल्फ-रिस्पेक्ट, महिलाओं की पहचान, और सोशल मीडिया प्रेशर जैसे विषयों को हल्के-फुल्के अंदाज़ में छूती है।
👎 कहां रह गई कमी?
😐 1. जान्हवी कपूर की परफॉर्मेंस
जान्हवी कपूर ईमानदार हैं, लेकिन कहीं न कहीं आलिया भट्ट की कमी खलती है।
उनकी डायलॉग डिलीवरी और इमोशनल सीन्स में वह पूरी तरह असर नहीं छोड़ पाईं।
🧍 2. कमजोर सपोर्टिंग कास्ट
सान्या मल्होत्रा और रोहित सराफ जैसे टैलेंटेड एक्टर्स भी इस फिल्म में underused लगते हैं।
किरदार काफी अनुमानित (predictable) हैं, जिससे कहानी में सरप्राइज की कमी महसूस होती है।
🎵 3. कहानी और म्यूजिक
फिल्म का स्क्रीनप्ले और संगीत दोनों ही औसत हैं।
‘हम्प्टी शर्मा’ या ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’ जैसे यादगार गाने यहां नहीं मिलते।
⚖️ आखिरी फैसला: देखें या नहीं?
‘सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी’ एक एक्टर-ड्रिवन फिल्म है, जो पूरी तरह वरुण धवन के कंधों पर टिकी है।
यह एक भव्य भारतीय शादी जैसी लगती है — बहुत सारा शोर-शराबा और रंगीन माहौल, लेकिन गहराई की कमी।
अगर आप वरुण धवन के फैन हैं या बस एक हल्की-फुल्की रोमांटिक कॉमेडी देखना चाहते हैं, तो यह फेस्टिव सीजन में एक बार देखने लायक है।
लेकिन अगर आप कहानी और इमोशन में गहराई तलाश रहे हैं, तो शायद यह फिल्म आपको अधूरा छोड़ दे।
संक्षेप में —
यह फिल्म देखने में बुरा आइडिया नहीं है,
खासकर अगर टिकट के पैसे कोई और दे रहा हो! 😉
🎥 फिल्म की जानकारी
- डायरेक्टर: शशांक खेतान
- निर्माता: करण जौहर
- कलाकार: वरुण धवन, जान्हवी कपूर, सान्या मल्होत्रा, रोहित सराफ, अक्षय ओबेरॉय
- अवधि: 134 मिनट
- जॉनर: रोमांटिक-कॉमेडी, फेस्टिव एंटरटेनर
