‘इडली कडाई’ मूवी रिव्यू: एक्टर-डायरेक्टर धनुष की नई फिल्म भावनाओं, परिवार और जड़ों से जुड़ाव की खूबसूरत कहानी है। जानिए कैसे उन्होंने इस इमोशनल फैमिली ड्रामा को अपने शानदार अभिनय और निर्देशन से डूबने से बचाया।
🍽️ ‘इडली कडाई’ मूवी रिव्यू: एक स्वादिष्ट ‘कंफर्ट मील’, जिसे धनुष ने डूबने से बचाया
कभी-कभी सबसे स्वादिष्ट खाना किसी बड़े फैंसी रेस्टोरेंट में नहीं, बल्कि घर की रसोई या किसी पुरानी गली की छोटी दुकान में मिलता है।
एक्टर-डायरेक्टर धनुष की नई फिल्म ‘इडली कडाई’ बिल्कुल उसी अपनेपन और सुकून का एहसास कराती है।
फिल्म की शुरुआत थोड़ी फीकी और क्लीशे से भरी लगती है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, यह अपने दिल को छू लेने वाले अंदाज़ से जीत लेती है।
🍛 कहानी क्या है? — बैंकॉक से शंकरपुरम तक
कहानी मुरुगन (धनुष) की है, जो अपने छोटे से गांव शंकरपुरम को छोड़कर बैंकॉक के एक बड़े होटल में नामी शेफ बन चुका है।
वह अपने बॉस विष्णु वर्धन (सत्यराज) की बेटी मीरा (शालिनी पांडे) से शादी करने वाला होता है। लेकिन विष्णु का बेटा अश्विन (अरुण विजय) उससे जलता है और कहानी में मोड़ लाता है।
एक घटना के बाद मुरुगन सब कुछ छोड़कर अपने गांव लौट आता है, जहां वह अपने पिता शिवनेसन (राजकुमार) की पुरानी ‘इडली की दुकान’ को फिर से जिंदा करने का फैसला करता है।
यहीं से शुरू होती है उसकी जड़ों से जुड़ने और आत्मसम्मान बचाने की लड़ाई।
💫 क्या अच्छा है? — फिल्म की आत्मा
धनुष का निर्देशन और अभिनय:
धनुष ने एक्टर और डायरेक्टर दोनों रूपों में बेहतरीन संतुलन दिखाया है।
फिल्म की आत्मा है — पिता और बेटे के रिश्ते की गहराई।
मुरुगन का अपने पिता की विरासत को समझने और अपनाने का सफर दर्शकों को भावुक कर देता है।
दिल छू लेने वाले पल:
नित्या मेनन (कायाल) के साथ धीरे-धीरे पनपता रिश्ता और दोस्तों के साथ इडली ग्राइंडर वाले मजेदार सीन, फिल्म को ‘कंफर्ट जोन’ में ले जाते हैं।
संगीत और सिनेमैटोग्राफी:
जी.वी. प्रकाश कुमार का संगीत इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है।
कुछ सीक्वेंस इतने खूबसूरत हैं कि थिएटर में तालियां बजने लगती हैं।
⚠️ कहाँ रह गई कमी?
- कमजोर पहला हाफ: बैंकॉक के शुरुआती हिस्से थोड़े बोरिंग और पुराने ढर्रे के लगते हैं।
- असंतुलित संदेश: फिल्म का संदेश “जड़ों से जुड़े रहो” अच्छा है, लेकिन यह उन लोगों को थोड़ा गलत ठहराती है जो बाहर जाकर बेहतर जीवन बनाना चाहते हैं।
- अधूरे सीन: कुछ इमोशनल सीन पूरे असरदार नहीं बन पाए, जैसे मुरुगन का अपने माता-पिता से फोन पर संवाद।
🎥 अंतिम फैसला — देखें या नहीं?
‘इडली कडाई’ कोई परफेक्ट फिल्म नहीं है, लेकिन यह दिल को सुकून देने वाली फिल्म है।
यह आपको घर की बनी नरम इडली की याद दिलाती है — सिंपल, प्योर और भरपूर इमोशन से भरी हुई।
अगर आप धनुष के फैन हैं या एक भावनात्मक फैमिली ड्रामा देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी।
📽️ फिल्म की जानकारी
- डायरेक्टर: धनुष
- कलाकार: धनुष, अरुण विजय, नित्या मेनन, राजकुमार, सत्यराज
- अवधि: 147 मिनट
- कहानी: एक मशहूर शेफ जो अपने पिता की पुरानी ‘इडली की दुकान’ को फिर से जिंदा करने के लिए समाज और परिवार से जंग लड़ता है।
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